अगर आपका मन ये जानने का हो कि आप होते तो अपने जज़्बातों को लफ्जों में कैसे ढालते । ये जानने का हो कि मुहब्बत में रंग कैसे भरा जाता है, रिश्तों को कैसे जीया जाता है या फिर ज़िंदगी के सितम से इंसानियत को किस खूबसूरती से गुज़ारा जाता है तो ठहर जाइये ....
ये किताब रूबरू करायेगी आपको, आपके वजूद से...
मुश्किल से मुश्किल बात को साधारण तरीके से और साधारण सी बात को बहुत असरदार तरीके से रंगो में ढालकर यूँ कह जाने का हुनर कि आँखों में एक अक्स सा ठहर जाये, संदीप ‘अंजुमन’ की अदा है ।
बचपन की बात हो, माँ का दुलार, पिता का प्यार, दिल के जज़्बात हो, प्रेम की बात हो, आम इंसान का दुख दर्द हो या फिर यादों का सफर, उनकी शायरी और नज़्में हमें यूँ जोड़े रखती हैं कि जैसे हमारी ही बात हो । नज़्म हैं या सवाल, नहीं मालूम। सवाल भी हम और जवाब भी हम । ये गहराई और विविधता, ज़िन्दगी के नये भाव और भावनाओं की ईमानदारी उनकी विशेषताएँ हैं ।
उनकी साधारण एवं आम बोलचाल की भाषा तथा जन-मानस के जज़्बातों को दिल से व्यक्त करने का तरीका सराहनीय है ।
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