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Baapu tumhe Kisne Maara / बापू तुम्हें किसने मारा समय से संवाद करती कविताएँ

Author Name: Ishwar Dayal | Format: Hardcover | Genre : Poetry | Other Details

“बापू तुम्हें किसने मारा” केवल एक प्रश्न नहीं, बल्कि हमारे समय से किया गया एक साहसी और ईमानदार संवाद है। यह काव्य-संग्रह सत्ता, राजनीति और सामाजिक व्यवस्था के बीच खड़े होकर मनुष्य, समाज और नैतिक मूल्यों पर तीखे प्रश्न उठाता है।

इन कविताओं में सत्ता की विडंबनाएँ, जनता की पीड़ा, भूख, भाषा, धर्म और ‘कुर्सी’ सशक्त एवं जीवंत प्रतीकों के रूप में उभरते हैं।

भाषा सरल है, पर प्रश्न असुविधाजनक—जो पाठक को ठहरकर आत्ममंथन करने को विवश करते हैं। यह संग्रह केवल प्रतिरोध की आवाज़ नहीं, बल्कि करुणा, स्मृति, शोक और मानवीय संवेदना की भी गहन अभिव्यक्ति है—जहाँ देश कभी माँ की तरह कराहता है और मनुष्य अपने ही समय से जूझता दिखाई देता है।

यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो कविता को केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि सच कहने का साहस मानते हैं।

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ईश्‍वर दयाल

ईश्वर दयाल का जन्म 20 नवम्बर 1944 को झारखंड के बोकारो ज़िले के एक किसान परिवार में हुआ। श्रम, मिट्टी और जीवन–संघर्ष से मिली सीख ने उनके व्यक्तित्व और दृष्टि को गहराई प्रदान की।

अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे शिक्षक रहे और बाद में बिहार प्रशासनिक सेवा में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे। देवघर के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) के रूप में उनका कार्यकाल विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा।

प्रशासनिक जीवन में समाज, सत्ता और आम जनजीवन को निकट से देखने का अनुभव उनकी कविताओं को ठोस यथार्थ, नैतिक प्रश्नों और विश्वसनीय संवेदना से समृद्ध करता है। “बापू तुम्हें किसने मारा” उनका प्रथम प्रकाशित काव्य-संग्रह है—दशकों में संचित अनुभव, चिंतन और मानवीय करुणा की सशक्त अभिव्यक्ति।

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