क़िस्से कहीं से नहीं बल्कि हमारी और आपकी जिंदगी से ही आते हैं, जिन्हें लेखक अपनी कल्पना के मालाओं में पिरो कर पाठकों के सामने पेश करता है। उन रोचक किस्सों का संबंध कहीं ना कहीं पाठक से होता है। ऐसे ही बातों-बातों में कहानियाँ बन जाती है। ऐसी ही बनी कहानियों को रचनाकार ने इस किताब “बातों-बातों में” बड़ी ही खूबसूरती और संजीदगी से पिरोया है। यह उनका दूसरा कथा-संग्रह है।