ये कहानी है, रवि की , विचारों की और भाग्य की ।
कैसे रवि अपने जीवन को विचारों से मुस्किल और आसान बनाता है, और इस विचारों कि यात्रा में उसका साथ निभाते हैं कल्पेंन ओर धनु ,
सपनों कि उड़ान भरना कितना मुस्किल होता है, क्या सच में रवि अपने सपनों को पाता है, या एक आम जिंदगी जीने लगता है, इन सब
सवालों का जवाब आपको मिलेगा इस किताब में जिसका नाम है 'भाग्य द्वार के रक्षक' ।