संत-साहित्य का चिंतन विभिन्न विचार-सरणियों का अपूर्व समुच्चय है। अज्ञान, अशिक्षा और अनैतिकता का अंधकारमय युग काल में ये संत जनता के निम्न स्तर से संबंधित ज्ञान की जो ज्योति प्रज्ज्वलित की, वह अद्भूत एवं अपूर्व है। सुसंस्कृत युग और सुशिक्षित समाज के प्रतिष्ठित संतों द्वारा उच्चकोटि की भक्ति साहित्य का सृजन होना कम महत्त्व की बात नहीं किन्तु अपने पतन की चरमावस्था में भी पतित, दलित एवं जर्जरित समाज का ऐसे महान प्रतिभाशाली, गंभीर चिंतक एवं स्पष्टवक्ता संत, वचनकार को जन्म दे देना ऐसा आश्चर्य है जिसका दूसरा उदाहरण विश्व-इतिहास में शायद ही कहीं अन्यत्र मिले। संतों की शाश्वत वाणी का महत्त्व मध्ययुग में ही नहीं, भारतीय संस्कृति के लिए हर युग में महत्व का है।
इस पुस्तक में देश के विभिन्न भाषा के संत साहित्यकारों का परिचय प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है । इस पुस्तक में देश के अलग-अलग प्रदेशों के प्रमुख संत साहित्यकारों से संबंधित शोधपरक लेख संगृहित हैं । हिन्दी प्रदेश के संतसाहित्यकार और हिन्दीतर प्रदेश के जैसे कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा आदि राज्यों से संत साहित्यकारों पर, ज्ञानी रचनाकारों ने महत्वपूर्ण लेख प्रदान करके इस सारस्वत कार्य को समृद्ध बनाया ।