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Brahman Utpatti, Gotra aur Parampara / ब्राह्मण उत्पत्ति, गोत्र और परम्परा (गोत्र, प्रवर, शाखाएँ और इतिहास)

Author Name: Dr. Rajneesh Kumar Sharma | Format: Hardcover | Genre : Educational & Professional | Other Details

भारत में शायद ही कोई ऐसा परिवार हो जिसने कभी ‘गोत्र’- शर्मा’ ‘मिश्र’, ‘तिवारी’, ‘उपनयन’, ‘विवाह’ या ‘वंश’ जैसे शब्द न सुने हों। किन्तु क्या हम वास्तव में जानते हैं कि गोत्र क्या है? क्या उपनाम से गोत्र जाना जा सकता है? क्या ब्राह्मण केवल जन्म से बनता है? क्या सभी ब्राह्मण एक जैसे हैं? और आधुनिक भारत में ब्राह्मण पहचान का क्या अर्थ रह गया है? 

यह एक विस्तृत, शोधपूर्ण और सन्तुलित ग्रन्थ है, जिसमें ब्राह्मणों की उत्पत्ति, वर्ण-व्यवस्था, गोत्र, शाखाएँ, उपनाम, सामाजिक इतिहास, साहित्य, राजनीति, विज्ञान, सुधार आन्दोलन और आधुनिक भारत तक की पूरी यात्रा प्रस्तुत की गयी है।

यह पुस्तक न तो अन्ध-गौरव का ग्रन्थ है, न अन्ध-आलोचना का। यह इतिहास, प्रमाण और विवेक के आधार पर लिखा गया एक ऐसा ग्रन्थ है, जो सामान्य पाठकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और अपने परिवार की जड़ों को जानने वाले हर व्यक्ति के लिए उपयोगी है।

”न जात्या ब्राह्मणो भवति, कर्मणा ब्राह्मणो भवति।“

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Rajneesh Kumar Sharma

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डॉ. रजनीश कुमार शर्मा

डॉ. रजनीश कुमार शर्मा एक चिकित्सक, शोधकर्ता और भारतीय परम्परा के गंभीर अध्येता हैं। उन्होंने ब्राह्मण, गोत्र, वंश, इतिहास और भारतीय समाज से जुड़े विषयों पर दीर्घकाल तक अध्ययन और लेखन किया है। उनकी लेखनी का उद्देश्य किसी पूर्वाग्रह का समर्थन नहीं, बल्कि तथ्यों, परम्पराओं और इतिहास को संतुलित एवं प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है। इस पुस्तक के माध्यम से उन्होंने ब्राह्मण परम्परा, गोत्र और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को सरल, स्पष्ट और शोधपरक शैली में पाठकों के सामने रखने का प्रयास किया है।

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