वो बचपन का प्यार... जो उम्र भर दिल में रह जाए।
वो रिश्ते... जो दिल से जुड़ते हैं पर समाज से नहीं।
वो सवाल... जो चुपचाप अंदर जलते हैं।
सौम्या का प्यार सच्चा था। उसका डर भी।
उसे मुसब्बिर से मोहब्बत थी, लेकिन अपने आप से भी कुछ वादे थे।
प्यार, धर्म, समाज और पहचान के बीच झूलती ये कहानी आपको सोचने पर मजबूर करेगी—
‘बुर्का’ एक लड़की की कहानी है, जो अपने वजूद को बचाने के लिए लड़ती है।
जहाँ मोहब्बत के साथ-साथ सवाल भी हैं—धर्म के, पहचान के, और समाज के।
क्या आपने कभी अपने अंदर की आवाज़ को सुनने का साहस किया है?
जब दिल कहे ‘हाँ’ और दिमाग कहे ‘नहीं’, तब सबसे मुश्किल लड़ाई वही होती है—जो हम ख़ुद से लड़ते हैं।
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