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Chehron Ke Chourahe / चेहरों के चौराहे

Author Name: Ram Niwas Bairwa | Format: Paperback | Genre : Literature & Fiction | Other Details

मनीष पटना के पास नालन्दा का रहने वाला था और बीटेक करने के बाद एक सरकारी कम्पनी में इंजिनियर की नौकरी कर रहा था। फेसबुक पर उसकी दोस्ती सुनीता से हुयी थी। एक-दो बार मनीष सुनीता से मिलने जयपुर भी आ चुका था। उनकी मुलाकातें शादी के बंधन में बंधने की भूमिका तैयार कर चुकी थी।
 मनीष के माता-पिता इस रिष्ते के पक्ष में नहीं थे। पहला कारण तो यह कि अन्तरजातीय विवाह होने जा रहा था। दूसरा यह कि लड़की के बारे में और उसके घरवालों के बारे में वे बिल्कुल अंधेरे में थे, बेषक लड़की एक ब्राह्मण परिवार से थी और सबसे बड़ी अड़चन थी दहेज की। अपने इंजीनियर बेटे के लिए दस लाख का दहेज तो पक्का मान कर ही चल रहे थे। यदि बिहार में ही मनीष की शादी हुई होती तो दस लाख क्या मुंह मांगा दहेज मिल जाता। परन्तु यहाँ तो दहेज की कोई बात ही नहीं हो सकती थी। मनीष के माता-पिता मजबूर थे। वे अपनी खुषी के पीछे बेटे को खोना नहीं चाहते थे। 

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राम निवास बैरवा

राम निवास बैरवा का जन्म 6 अक्टूबर, 1952 को दिल्ली में हुआ। प्रारम्भिक षिक्षा राजस्थान में जयपुर जिले के ग्राम मौजमाबाद में हुई। हिन्दी स्टेनाग्राफी में डिप्लोमा लेने के बाद कर्मचारी भविष्य निधि सगठन में लिपिक की नौकरी करते हुए क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त- ग्रेड.।। के पद से 2012 से सेवानिवृत हुए।
नौकरी के दौरान भविष्य निधि एवं श्रम कानूनों की जानकारी प्राप्त की और ‘कर्मचारी भविष्य निधि एवं प्रकीर्ण उपबन्ध अधिनियम, 1952’ का हिन्दी में अनुवाद करके एवं हिन्दी में व्याख्या लिखकर, 1994 में द्विभाषी रुप में छपवाया, जिसका 2021 में पच्चीसवां संस्करण प्रकाषित हो चुका है। ‘‘सामाजिक सुरक्षा एवं कर्मचारी भविष्य निधि’’ जैसी समीक्षत्मक पुस्तक के अलावा प्रकाषित हो चुकी पुस्तकों में निम्न पुस्तकें प्रमुख हैं-

·                Step by Step Into EPF-A Guide to EPF (English) (3rd Ed.- 2018)

·                Step by Step Into EPF- Compilation of Supreme Court Cases (2011)

·                इंडिया देड इज भारत-संवैधानिक भारत-एक समीक्षा-2013

·                अन्तर्राष्ट्रीय वित्तीय पूंजी और भारतीय अर्थ व्यवस्था -2013

·                अन्तर्राष्ट्रीय वित्तीय पूंजी का साम्राज्य -2018

·                राजनैतिक चैंज-मैनेजमेंट -2017


‘चेहरों के चौराहें’ राम निवास बैरवा का पहला उपन्यास है।

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