मनीष पटना के पास नालन्दा का रहने वाला था और बीटेक करने के बाद एक सरकारी कम्पनी में इंजिनियर की नौकरी कर रहा था। फेसबुक पर उसकी दोस्ती सुनीता से हुयी थी। एक-दो बार मनीष सुनीता से मिलने जयपुर भी आ चुका था। उनकी मुलाकातें शादी के बंधन में बंधने की भूमिका तैयार कर चुकी थी।
मनीष के माता-पिता इस रिष्ते के पक्ष में नहीं थे। पहला कारण तो यह कि अन्तरजातीय विवाह होने जा रहा था। दूसरा यह कि लड़की के बारे में और उसके घरवालों के बारे में वे बिल्कुल अंधेरे में थे, बेषक लड़की एक ब्राह्मण परिवार से थी और सबसे बड़ी अड़चन थी दहेज की। अपने इंजीनियर बेटे के लिए दस लाख का दहेज तो पक्का मान कर ही चल रहे थे। यदि बिहार में ही मनीष की शादी हुई होती तो दस लाख क्या मुंह मांगा दहेज मिल जाता। परन्तु यहाँ तो दहेज की कोई बात ही नहीं हो सकती थी। मनीष के माता-पिता मजबूर थे। वे अपनी खुषी के पीछे बेटे को खोना नहीं चाहते थे।