यह काव्य संग्रह दादी का अपनी पोती के प्रति अनन्य स्नेह,त्याग एवं ममता का अनुपम दर्पण है।
दादी निस्वार्थ भाव से सांय काल में पोती को लाती। पोती उछलती,कूदती आती,गोद में बैठ कर हनुमान चालीसा सुनते सुनते ताली बजाती। सब कुछ लट गया। दादी की ममता और दादा की पीड़ा की गहन शब्दों की अभिव्यक्ति हैं यह किताब।
लेखक का प्रयास पोती को समर्पित
(रवि गुप्ता)