डॉक्टर आंबेडकर ने एक ‘प्रबुद्ध भारत’ की परिकल्पना की थी, जहां समानता एक आदर्श, एक मानक है, ऐसा भारत जो सामाजिक और मनोवैज्ञानिक अर्थ में एक वास्तविक राष्ट्र है, जहां भाईचारा एक सच्चाई है, क्योंकि वही स्वतंत्रता और समानता को बनाए रख सकता है।
सही मायने में एक लोकतांत्रिक भारत, जहां शासक हमेशा शासक वर्ग से नहीं आते; जहाँ शासित वर्ग शासक वर्ग बनते है, जहां धर्म यह विज्ञान से सुसंगत है।
यह पुस्तक भारत में वैज्ञानिकता, धर्मनिरपेक्षता के हो रहे मुक्त पतन के कारण उत्पन्न बेचैनी का परिणाम है।