“Poetry is the spontaneous overflow of powerful feelings: it takes its origin from emotion recollected in tranquillity". ~ William Wordsworth.
हमारी दिल की गहरी अनुभूतियों को प्रकट करते में जब गद्य गूँगा हो जाता है, वहाँ कविता जन्म लेती है .
काव्य संग्रह“घुप्प अँधेरे” जीवन में बदलते रिश्तों से दिल के घुप्प अंधेरों में खो गए मनोभावों का अन्वेषण करता है, प्रेम से सहलाता है और संघर्ष करके सत्य स्थापित करता है.
ये काव्य संग्रह आधुनिक कविता, ग़ज़ल, हाइकू, हास्य व्यंग्य, राष्ट्र प्रेम और क्षणिकाओं के पुष्पों से गुंथा एक मनोरम हार है.
प्रेम का स्वरुप स्थापित करती ये पंक्तियाँ-
मुझे ग़म नहीं, तू रूठ कर चला गया
ज़हन में मेरे डर है, तू कहीं टूट न जाये
कविता “भारत वंदना” ईश्वर से विनय करती है –
भारतजन यशस्वी हों, विशुद्ध ज्ञान का हो प्रकाश
दिव्य दृष्टि राजा की हो, हो शत्रु दृष्टि का सर्वनाश
सुधी पाठक अगर ये महसूस करें कि काव्य संग्रह “घुप्प अँधेरे” का संघर्ष उनका अपना संघर्ष है तो हम समझेंगे की कविता अपने प्रियतम तक पहुंच गयी है.
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