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Gurudakshina / गुरुदक्षिणा

Author Name: Divya Sinha | Format: Paperback | Genre : Poetry | Other Details

भारतीय परंपरा में गुरु-शिष्य की परंपरा सदा से रही है, जहाँ गुरु को एक अत्यंत सम्माननीय स्थान प्राप्त है | हमारी परंपरा में गुरु का सम्मान भगवान के पूर्व करने की बात कही गई है, क्योंकि गुरु के बिना तो हमें यह ज्ञान नहीं हो सकता कि भगवान हैं कौन?

पूर्व समय में गुरु जन अपने कर्तव्य का निर्वहन उचित ढंग से करते थे और शिष्य भी बहुत आज्ञाकारी हुआ करते थे | इस प्रकार यह संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण था |

किन्तु वर्तमान परिप्रेक्ष्य में यह पवित्र प्रणाली एक सीमा तक समाप्त हो चुकी है | बाकी संबंधों की भाँति इस संबंध पर भी आधुनिकता की छाप पड़ चुकी है | अब इस संबंध में भी लोलुपता और लोभ ने अपना स्थान बना लिया है |

इसी आधुनिक गुरु-शिष्य प्रणाली पर आधारित यह वास्तविक घटना का सारांश रूप दिव्या जी ने इस पुस्तिका में वर्णित किया है | जहाँ दिया नामक नायिका के जीवन में उसके एक गुरु के व्यवहार का दुष्प्रभाव पड़ता है |

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दिव्या सिन्हा

इनका नाम दिव्या सिन्हा है, ये मध्य प्रदेश की रहने वाली हैं | इन्होंने एम. कॉम. तक की शिक्षा प्राप्त की है | मुंशी प्रेमचंद और महादेवी वर्मा को पढ़ कर इन्हें लेखन की प्रेरणा मिली | इन्होंने अपनी लेखन यात्रा सितम्बर 2021 से शुरू की और अब तक 300 से अधिक संकलनों में सह-लेखिका रह चुकी हैं, साथ ही ये 15 संकलनों की संकलक भी रह चुकी हैं | ये WP Publication (Writer's Paradise Publication) की प्रथम संकलक हैं |

ये 2021 में सनसोली कंपनी में 'हेड ऑफ डिजिटल मार्केटिंग' के पद पर कार्य कर चुकी हैं एवं 2022 में हमरूह पब्लिकेशन हाऊस में 'काउंसलर' के पद पर कार्य कर चुकी हैं |

इन्हें विभिन्न विषयों पर पुस्तकों का अध्ययन अत्यंत रोचक लगता है तथा गायन कला में इनकी विशेष रुचि है | इन्हें चित्रकारी और नृत्य में भी रुचि है तथा 15 भारतीय भाषाओं का ज्ञान है |

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