मेरा नाम सृष्टि मौर्य है और में फरीदाबाद, हरियाणा की रहने वाली हूँ। मेरे पिताजी का नाम श्री पंकज कुमार, मेरी माताजी का नाम श्रीमती माधुरी मौर्य और मेरे भाई का नाम सुलभ मौर्य है। मुझे संपादक के नाम पत्र, उद्धरण, कविता और काल्पनिक कहानियां लिखना पसंद है। मेरी लिखी हुई कविता कॉलेज के मैगज़ीन में प्रकाशित हुई है व मेरे लिखे हुए संपादक के नाम पत्र अखबार ( दैनिक जागरण, जनसत्ता, हिंदुस्तान ) में प्रकाशित हुए है। मैंने सह-लेखक के रूप में 130 से भी ज़्यादा एंथोलॉजी में कार्य किया है व मैंने खुद की अपनी एंथोलॉजी में सात संकलक भी किये है। इसी के साथ मैंने अपनी खुद की पहली किताब भी लिखी है। जो वाकई मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। यह मेरी ज़िंदगी में एक नई मोड़ का आना जैसा है। मैंने कभी अपनी ज़िंदगी में यह नही सोचा था कि में एंथोलॉजी और संकलन भी करूँगी व अपनी खुद की किताब भी लिखूँगी। आखिर जो होता है अच्छे के लिए होता है। इस बात से यह हर कोई समझ सकता है कि ज़िन्दगी सभी के लिए कुछ न कुछ नया उपहार दे जाती है और समय के बदलते दौर भी दुनिया को धीरे-धीरे सब कुछ जाहिर कर देती है। वाकई बहुत खूबसूरत पल मेरे जीवन में आना मेरे लिए बहुत बड़ी बात है, लेकिन इसके पीछे भी किसी एक का साथ जरूर होता है जिसको लेकर आप कोई भी बड़ी सफलता हासिल कर सकते है। कभी भी अपने आप को दूसरों की तरह मत देखो..... सच कहूं, तो ये आपको अंदर से बहुत कमज़ोर और अपने अंदर का आत्मविश्वास खोने जैसा है। हर कोई दुसरो से अलग है, हर किसी में अपना एक अलग हुनर और सोच है। इसलिए बेफिक्र होकर आप इस खूबसूरत ज़िन्दगी को हँसी और खुशी के साथ जिये।