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Jazbaat / जज़्बात ये तेरे-मेरे...

काफी वक़्त से ख़्वाहिश थी के अपने कुछ शायर साथियों के साथ मिल कर जज़्बातो के मोतियों से पिरोई ग़ज़लों और नज़्मों की एक ऐसी किताब तैयार करके पेश की जाये जो सभी उर्दू-हिंदी पढ़ने वाले लोगों के लिए मुकम्मल तोहफा हो।

बस अब आप सब का इंतज़ार ख़त्म हिंदुस्तान की मुख़्तलिफ़ जगहों से अलग-अलग शायर ने अपने दिल की आवाज़ और जज़्बात अपनी ग़ज़लों के तौर पर भेजकर इस किताब का हिस्सा बने जो यकीनन आप सब का दिल छू लेंगे। 

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इरम फातिमा 'आशी', डॉ० एहतिशाम अज़ीज़, भीमसेन सिंह उज्ज्वल, तान्या सिंह, प्रोमिला भारद्वाज, डॉ शाज़िया शेख, शाहिद खान, हेमा भट्टारोय, मरहूम मुहम्मद आलम साहब, डॉ० रुचिदा बर्मन, ऋचा दीक्षित, मनीषा जोशी

इरम फ़ातिमा 'आशी', मुझे लिखने का हुनर विरासत में मिला और तेरह साल की उम्र से लिखना शुरू कर दिया था। मुझे लिखना और पढ़ना रूहानी सुकून देता है।

मेरी पहली कहानी 'मनोरमा मैगज़ीन' में स्कूल टाईम में र्प्रकाशित हुई थी, फिर कविताएँ हिन्दी-अंग्रेज़ी के न्यूज़पेपर और मैगज़ीन में प्रेकाशित प्रकाशित होती रही और हौसला बढ़ता चला गया।मेरी अब तक हिन्दी और इंग्लिश ग़ज़ल और कहानियों की संकलित संग्रह की कुल मिला कर 55 किताबें इंडिया, यू॰ अस. और कनाडा में प्रकाशित हो चुकीं हैं। रिफ्लेक्शन नाम की अंग्रेज़ी मैगज़ीन की 'एडिटर इन चीफ़' और प्रिंट जूनरल 'वीयू' की 'एगज़ीकूटिव एग्जीक्यूटिव सब कमेटी मैमबर' और आगमन की 'इंटरनेशनल कोडिनेडर' कोऑर्डिनेटर के काम से जुड़ी हुई हुँ। आगमन परिवार से 2015, 2016 & 2017 का गौरव सम्मान ज़िदगी के यादगार लमहों में से एक है।


 

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