कभी-कभार एक कवि अपने मन के भार को हल्का करने के लिए कागज़ कलम का सहारा लेता है, उन्हीं कुछ पलों में लिखी हुई कुछ चीज़ों को पिरोकर ये छोटी सी किताब का रूप दिया है मैंने।
अपने बारे में बता दूं कि मैं पेशे से वैसे एक बैंकर हूँ, मुझे लगा ये बता दूं क्योंकि, बैंकर, इंजीनियर, डॉक्टर इन सब लोगो से अगर पूछा जाता है कि आप क्या करते हैं तो कोई फॉलोअप सवाल नहीं होता है, परंतु एक कलाकार से जब भी पूछा जाता है कि आप क्या करते हैं, तो Follow-Up सवाल ज़रूर बनता है-
“ये सब तो ठीक है मगर काम क्या करते हो, बेटा?”
दूसरी जरूरी बात ये बतानी है जो जिंदगी ने मुझे सिखाई है कि सारी खुशियां खराब होने की एक ही वजह है - "उम्मीद"
तो आप लोगो से अनुरोध है कि उम्मीद बहुत कम रख के ये कविताओ का संग्रह पढ़े।
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