सुधा जैन के प्रस्तुत कविता संग्रह 'कितना कहने को बाकी है' की कविताएं पढ़ते हुए घर गृहस्थी के आंतरिक अनुभवों से गुजरना है जहां घर की यादें हैं,गृहस्थी की टकराहटें हैं,बच्चों की किलकारियां हैं और है पारिवारिक जीवन की अनेक छवियां।यहां परिवार का साथ है।प्रेम का बंधन है।प्रिय का साहचर्य है जिनको जीना है और जीते हुए जिन्हें धारण करना है।कई कविताओं में संबंधों की प्रगाढ़ता है या कि प्रगाढ़ संबंधों की अनेक छवियां हैं।