सर्वप्रथम मैं इस पुस्तक को अपने श्रद्धा सुमन के रूप में ईश्वर को समर्पित करना चाहती हूँ जिन्होंने मुझे इस काबिल बनाया कि अपने जज़्बातों को एक पुस्तक का रूप दे सकूं।
इस पुस्तक में लिखी हर कविता, हर मुक्तक को मैं अपने मम्मी-पापा के चरणों में समर्पित करना चाहती हूँ जिनके आशीर्वाद और मार्गदर्शन के बिना इस पुस्तक का साकार होना संभव नहीं था।
मैंने अपनी इस काव्य कृति में बहुत ही साधारण शब्दों में अपने मन के भावों को व्यक्त किया है, आशा है पाठकों को मेरे विचार पसंद आएंगे, अगर मेरे प्रयास में कोई कमी रह गई हो या कोई त्रुटी रह गई हो तो क्षमा प्रार्थी हूँ।
अंत में मैं unheard publication को धन्यवाद देना चाहूंगी जिन्होंने मेरे प्रयास को एक पुस्तक के रूप में साकार करने में मेरी सहायता की।
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