हमारी माँ से हमारा बेहद भावनात्मक रिश्ता होता है
इस पुस्तक में मैंने उन्ही भावनाओं को शब्दों में ढाला है
हमें जीवन देने वाली माँ का जीवन जब समाप्त हो जाए
तब उस वक्त की मनोदशा इस पुस्तक में आपको मिलेगी।
नांदेड (महाराष्ट्रा) की रहने वाली हिमाली रमेश सोलंकी बैचलर ऑफ फाइन आर्ट के चौथे वर्ष में पढ़ रहे हैं पेंटिंग में कई पुरस्कार प्राप्त करने के साथ उन्हें लेख लिखने की स्पर्धा में भी जब पुरस्कार पाया तो फिर उन्होंने अपने लिखने के शौक को गंभीरता से लिया लोग कहते हैं कि कम बोलने वाले अपनी भावनाओं को कागज पर उतार ते हैं यह बात उन पर सही बैठती है।