आपके साथ-साथ ये दुनिया ओ जन्नत ओ जहन्नुम तक सुनेंगे ;
यहाँ आप ग़ज़ल के साथ-साथ मेरे दिल का तरन्नुम तक सुनेंगे ।
ख़ुदा की आँखों से अश्के छलक जाए, यहाँ पर कसमें हैं ऐसी ;
जो जज़्बातों के सड़कों से गुज़रती है, यहाँ पर नज़्मे हैं ऐसी ।
जो ज़िंदगी को रौशन कर दे, वो चमक आपके इंतज़ार में है ;
आसमाँ में किसे तालाश रहे हैं, ऐसा नूर अपने अश'आर में है ।
अपने मुख़्तलिफ़ अंदाज़ ओ लहजे में, सबको कुछ बतला रही है ;
दीवान की गोद में देखो तो कैसे, शरारती शायरियाँ इठला रही है ।
ज़माना ख़ुद पे ख़ुद बदल जाएगा, बस तबदीली की जुस्तजू कर के तो देखिए ;
क़िस्मत आपके क़दमों में होगी, सिर्फ़ 'माणिक' से गुफ़्तगू कर के तो देखिए ।
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