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Maatr Maatraon Ka Khel Hai / मात्र मात्राओं का खेल है

Author Name: Nivedita Dinkar | Format: Paperback | Genre : Poetry | Other Details

एहसासों को अल्फ़ाज़ दे ही कब पाते हैं, एहसासों को तो मात्र फुसलाया जाता है...  

‘मात्र मात्राओं का खेल है’ इस बात का द्योतक है कि जैसे लेखन में सही मात्रा की नितांत आवश्यकता होती है, ठीक वैसे ही ज़िंदगी की यात्रा में भी मात्राओं का सही मिश्रण बेहद ज़रूरी है। आनंद, उल्लास, ख़्वाब, ख़्वाहिशें, दर्द, फ़िक्र आदि के सही ड्राफ़्ट से एक उम्दा सृजन मुक़म्मल होता है।  

 

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निवेदिता दिनकर

निवेदिता दिनकर हिन्दी व अंग्रेज़ी में लेख और कविताएं लिखती हैं। बरेली में बंगाली परिवार में पैदा हुईं निवेदिता पर्यावरण कंपनी ‘दास रासायनिक सर्विसेज़’, आगरा में  सीओओ (चीफ़ ऑपरेशन ऑफ़िसर) के पद पर कार्यरत हैं।

2019 में एकल काव्य संग्रह ‘इत्र तुम्हारी शर्ट का’ प्रकाशित। ‘कितनी गिरहें खोली हैं मैंने’ किताब में फ़िल्म ‘उत्सव’ पर आलेख 2022 में प्रकाशित। आठ साझा हिन्दी काव्य संग्रह और दो साझा अंग्रेज़ी काव्य संग्रह में कविताएं प्रकाशित। अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी और अंग्रेज़ी पत्र-पत्रिकाओं व ब्लॉग में कविताएं और लेख प्रकाशित। 

2015 में आगमन संस्था द्वारा बेस्ट पोएट अवॉर्ड। 2016 में भारतीय भाषा अकादमी द्वारा हास्य कवि पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा के हाथों समीक्षा सम्मान। 2017 में कविकुम्भ द्वारा स्वयंसिद्धा सृजन सम्मान।

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