मैं भी सोचूँ तू भी सोच इस ग़ज़ल के गुलदस्ते में अलग अलग किसम के फूल है | हर ग़ज़ल में यह कोशिश है की वह इंसान की रूह को छू सके और उसको सोचने में भी मजबूर कर सके की कही यह मेरे जज़्बात तो नहीं ? उम्मीद है की यह पुस्तक आप को पसंद आए |
चंद्रेश ठाकर अपनी गज़ले, गीत, कहानियां गुजरती, हिंदी, मराठी, अंग्रेजी और उर्दू में लिखते है. उनकी कविताए ज्यादातर इन्सान की भावनाओ को टटोलती है | आज़ाद लम्हे, इब्तदा इ सुख़न यह दो उन की और कविताओं के संग्रह है |