क्या शिक्षण का अर्थ केवल अधिक बोलना है, या जीवन को गहराई से छूना?
"मैं सिखाऊँगा – भूल कर दिखाओ" सीखने, नेतृत्व और प्रभाव की पारंपरिक सोच को चुनौती देती है। अनुभव, अनुशासन और करुणा से उपजी यह पुस्तक बताती है कि सच्चे मार्गदर्शक अधिकार से नहीं, बल्कि प्रेम, चरित्र और सजग कर्म से श्रोताओं को आजीवन शिष्य बनाते हैं। शिक्षकों, अभिभावकों, नेताओं और वक्ताओं के लिए यह उद्देश्यपूर्ण शिक्षण, चेतना-जागरण और अमिट प्रभाव की प्रेरक पुकार है।