मेरा नाम ममता है। मेरा नाम प्रत्येक दिन मुझे मेरे कर्तव्य को पूरा करने की प्रेरणा देता है। अपने व्यक्तित्व का बाकी परिचय मैं इस छोटी सी कविता के माध्यम से देने का प्रयास करूंगी। यह भी हूं मैं-
कभी उलझी कभी सुलझी सी मैं।
कभी बिखरी, कभी सिमटी सी मैं
बेटी, मां, बहन सब रिश्तो में प्रेम की डोरी से बंधी सी मैं।
कभी डर जाती देख छिपकली दीवार पर ,
कभी कुरीतियों के विरुद्ध अकेली खड़ी सी मैं।
कभी लिखकर जला देती हूं दिलो में 'मशाल' ,
कभी जिंदगी के तूफानों में ठिठुरी, पर अड़ी सी मैं। हिंदी की किताबें पढ़ने का शौक मुझे बचपन से था और लेखकों की जीवनियों को पढ़ने का भी क्योंकि मुझे हिंदी साहित्य में रुचि थी इसलिए जब मैंने M.A. हिंदी की पढ़ाई शुरू की तब विभिन्न लेखकों को और अच्छे से पढ़ने का सुअवसर मिला। हिंदी साहित्य से रूबरू होने का सफर इतना सुहाना हो गया कि मेरे मन मस्तिष्क में उठने वाले विचारों को मैंने कागज़ पर उतारना शुरू कर दिया ।मैंने कहानियां भी लिखी है जो एक श्रृंखला के रूप में शीघ्र ही आपके सम्मुख प्रस्तुत होंगी ।'मशाल' काव्य संग्रह मेरा पहला काव्य संग्रह है। त्रुटियों के लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं। कृपया अपना प्रेम व आशीर्वाद देकर इसे सफल बनाएं। ममता भटनागर