"मैं और चाँद" सिर्फ एक किताब नहीं है, ये एक सपना है जो मेरे साथ बड़ा हुआ है। इस किताब में मेरे जैसे ही सभी लेखकों की कुछ ख़्वाहिशें और सपने बंद हैं।
मैं और चाँद- सभी की जिंदगी में एक ख़ास दोस्त होता है जिसे वो अपनी हर बात बताते हैं चाहे फिर वो प्यार हो, नाराज़गी हो, इंतेज़ार हो या इजहार। मेरी ज़िंदगी में मेरा वो दोस्त चाँद है और मेरे सह- लेखकों का भी।
ये किताब एक जरिया है सभी लेखकों के लिए अपनी बात खुलकर कह देने का, जहाँ वो बेबकी से अपने सभी सपनों और ख्वाइशों को इस आशा के साथ लिखते हैं कि पाठक उनसे जुड़ सके।