यह पुस्तक मूर्तिकला के छात्रों और कला प्रेमियों को, विशेष रूप से हिंदी भाषा में, पाश्चात्य आधुनिक और समकालीन मूर्तिकला का व्यापक ज्ञान प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इस पुस्तक में मैंने दृश्य कला के क्षेत्र में एक मूर्तिकार के रूप में अभ्यास से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को सरल और प्रभावी भाषा में संकलित करने का प्रयास किया है।
इसमें मूर्तिकला की विकास यात्रा को पारंपरिक विधियों से लेकर 3D प्रिंटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों तक प्रस्तुत किया गया है। साथ ही, 19वीं और 20वीं शताब्दी के मूर्तिकला आंदोलनों जैसे इंप्रेशनिज़्म, क्यूबिज़्म, दादा, सुर्रियलिज़्म और एब्स्ट्रैक्ट एक्सप्रेशनिज़्म का विस्तृत वर्णन किया गया है। इसके अतिरिक्त, समकालीन कला रूपों जैसे इंस्टॉलेशन आर्ट, साइट-स्पेसिफिक आर्ट, परफॉर्मेंस आर्ट तथा नई मीडिया कला जैसी उभरती प्रवृत्तियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई है।
इसके अलावा, यह पुस्तक मूर्तिकला के क्षेत्र में व्यावसायिक संभावनाओं और एक पेशेवर मूर्तिकार के रूप में करियर निर्माण से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं को भी समाहित करती है, जिससे इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले पाठकों को मार्गदर्शन प्राप्त हो सके। आशा है कि यह पुस्तक कला प्रेमियों और छात्रों के लिए ज्ञानवर्धक और उपयोगी सिद्ध होगी।