'रूह' - अनंत ज्योति यह एक काव्य संग्रह है। जिसे आज की आधुनिक पीढ़ी की कवित्रि दिक्षा बावा जी की कलम से कुछ अमूल्य कविताओं से सजाया गया है। इस किताब के नाम में ही इसका अर्थ छुपा है। दिक्षा बावा जी ने अपनी रूह यानि अंतरात्मा की भावनाओं को व्यक्त किया है। उनकी कविताओं में ना सिर्फ उनके अपने विचार झलकते हैं बल्कि पढ़ने वाले भी इन कविताओं से खुद को जोड़ के देख सकते हैं। उनकी कविताएँ श्रृंगार रस और भक्ति रस से प्रभावित हैं। आज के दौर में जब इंसान अपने व्यस्त जीवन में खो के रह जाता है, तब ये कविताएँ इंसान को खुद से मिलने की, खुद को बेहतर जानने का अवसर प्रदान करती हैं।