Share this book with your friends

Sagar Manthan / सागर मंथन खंडकाव्य

Author Name: Kaurav Shubhank Patel | Format: Paperback | Genre : Poetry | Other Details

'सागर मंथन' की घटना सनातन संस्कृतत मेंएक ववशेष महत्व रखती
है। सनातन संस्कृतत मेंतनसंदेह रामायण एवं महाभारत सवााधिक
महत्वपूणा महागाथायें हैंपरंतुसनातन संस्कृतत सदैव सेही ऐसी
अनधगनत पौराणणक महागाथाओं सेसमद्ृ ि रही है, उनहीं मेंसेएक
अभूतपूवा घटना 'सागर मंथन' है। प्राचीन समय मेंककसी बात से
क्षुब्ि होकर दवुाासा ऋवष नेदेवराज इंद्र को श्राप दे ददया जजसके
फलस्वरूप उनका स्वगासस ंहासन चला गया तथा देव शजततहीन हो
गए। तब देवों नेश्री नारायण को याद ककया जजनहोंनेपुनः शजतत
प्राप्त करनेहेतुअमतृ पान का सुझाव ददया जो 'सागर मंथन' से
प्राप्त होना था परंतुसागर मंथन से सवाप्रथम ववष 'हलाहल या
कालकूट' प्राप्त हुआ जजससेयह दााँव उल्टा पड़ गया तथा जजसके
प्रकोप सेसम्पूणासजृटट प्रलय के मुहानेपर आकर खड़ी हो गई। तब
देवों ने परम शजततशाली महादेव का स्मरण ककया जजनहोंने उस
हलाहल ववष को अपने कं ठ में िारण करके सजृटट को प्रलय से
बचाया। तात्पयायह हैकक जब भी आप ककसी परेशानी मेंहोतेहैंतो
आप उस परमशजतत को स्मरण करतेहैंजो आपके समस्त पीड़ाओं
को हर लेतेहैतथा आपको तनववाघ्न जीनेकी स्वछंदता प्रदान करते
हैं। उतत अभूतपुवाघटना को कालांतर के क्रम मेंइस खंडकाव्य में
प्रस्तुत करनेका प्रयास ककया है।

Read More...

Ratings & Reviews

0 out of 5 ( ratings) | Write a review
Write your review for this book
Sorry we are currently not available in your region.

कौरव शुभांक पटैल

लेखक शुभांक पटैल (कौरव) गाडरवारा तहसील जिला नरसिंहपुर के निवासी हैं एवं शासकीय सेवा में कार्यरत हैं, लेखक की पौराणिक कथाओं में विशेष रुचि है तथा इन विषयों पर  काव्य सृजन करना इनकी विशेषता है। वैसे तो लेखक ने बहुत सारी कविताओं का सृजन किया है, परंतु मुख्य रूप से 'सागर मंथन' विषय पर अत्यंत ही लोकलुभावन कविता लिखी है जिसे पूर्व में प्रकाशित करवा चुके हैं।

Read More...

Achievements

+5 more
View All