क्या शिव और शक्ति केवल देवताओं के प्रतीक हैं, या वे चेतना और सृष्टि के गहरे विज्ञान का प्रतिनिधित्व करते हैं?
आज की तेज़ भागती दुनिया में हम अक्सर बाहर उत्तर खोजते-खोजते यह भूल जाते हैं कि ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्य हमारे भीतर ही छिपा है। “शक्ति से शिव तक — ब्रह्मांड से पिण्ड तक की अंतर्यात्रा” इसी आंतरिक खोज का आमंत्रण है।
यह पुस्तक शिव-शक्ति, चेतना, कुंडलिनी, चक्र, नाड़ियों और मानव शरीर के आध्यात्मिक विज्ञान को सरल भाषा में समझाती है। लेखक ने वेद, उपनिषद, तंत्र, योग और ललिता सहस्रनाम की परंपरा को आधुनिक विज्ञान, न्यूरोसाइंस और चेतना अध्ययन के दृष्टिकोण से जोड़ने का प्रयास किया है।
इस पुस्तक में आप जानेंगे:
• ब्रह्मांड की उत्पत्ति और चेतना का रहस्य
• शिव और शक्ति का वास्तविक दार्शनिक अर्थ
• मानव शरीर के तीन शरीर, पाँच कोष, सात चक्र और 72,000 नाड़ियों का विज्ञान
• भक्ति, मंत्र, ध्यान और साधना के पीछे छिपा आध्यात्मिक तंत्र
• भोग से मोक्ष तक की साधक यात्रा
यह पुस्तक विशेष रूप से उन आधुनिक seekers, ध्यान साधकों, योग अभ्यासियों और आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के लिए लिखी गई है जो परंपरा और विज्ञान के बीच एक सेतु खोज रहे हैं।
यदि आप जानना चाहते हैं कि मानव शरीर ही ब्रह्मांड का सूक्ष्म रूप कैसे है, और कैसे चेतना की यात्रा शक्ति से शिव तक पहुँचती है—तो यह पुस्तक आपकी अंतर्यात्रा का पहला कदम बन सकती है।
Keywords: शिव शक्ति, कुंडलिनी, चक्र, ध्यान, तंत्र, योग, चेतना, आध्यात्मिक विज्ञान, ललिता सहस्रनाम, देवी साधना।
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