"सिर्र-ए-उल्फ़त", में कैफ़ अब्बास के वो कलाम है जिन्हे उन्होंने ने उर्दू में लिखा था। इस किताब में कुछ अशआर है, कुछ गज़ले है। या ये कहना ज़्यादा बेहतर है कि इस किताब में कुछ एहसासात है जिन्हे लफ्ज़ो की चादर उढ़ा कर पेश करा गया है। उम्मीद है की इस किताब को मोहब्बत से आप हज़रात क़ुबूल फरमाएंगे। ये किताब आप के लिए सुकून-ए-क़ल्ब होगी। इसमें लिखा हर एक हर्फ़ आप के ज़ेहन को छू कर, आपको अपनेपन का एहसास दिलाएगा। और हो सकता है कि आप में से बहुत से लोग ऐसे होंगे जिन्हे इसको पढ़ने के बाद ऐसा लगेगा की मानो उनके खुद के अहवाल उन्हें कोई सुना रहा हो।
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