तरकश संग्रह है, पैने, नुकीले, धारदार व्यंगों का । ये संग्रह है चंद पंक्तिओं में कही गयी संजीदा बातों का । ये प्रहार है, सामजिक कुरीतियों, आडम्बर , अव्यवस्थाओं, राजनैतिक दांव पेच व दोगलेपन पर। सरल परन्तु धारदार शब्दों के माध्यम से एक प्रयास है सोये हुए विचारों को झकझोर के जगाने का I तरकश का हर तीर आपकी अंतरात्मा पर सीधा प्रहार है, जो मजबूर कर देगा आपको सोचने पर, अपने आस पास फैली विसंगतियों के बारे में।
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