मानव हृदय शाश्वत प्रेम, मानवता, प्रकृति एवं देश-प्रेम के भावों से भरा होता है। “तुम” काव्य संग्रह के रचयिता ने अपने अन्तर्मन के इन्हीं भावों को शब्दों में उकेरा है। कविताओं में ग्रामीण अंचल का जीवन, अभाव और संघर्ष है तो कहीं-कहीं समकालीन परिदृश्य पर कटाक्ष भी है।
‘तुम’ कविता में प्रिये से विछोह् का, ‘पचमढ़ी में बसंत’, में प्रकृति व प्रेम का एवं ‘एक बूंद’ में सागरतल में पड़ी एक उदास बूंद के संघर्ष का मर्मस्पर्शी चित्रण है।
जीवन के सभी रंगों में रंगा यह काव्य संग्रह हमें अपने गांव, बचपन, यौवन और बीते हुये दिनों को एक बार पुन: जीने का अवसर देता है, और आनंद से भर देता है।
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