यह संकलन मेरी अनुभूतियों का संकलन है, मेरी अभिव्यक्तियों का संकलन है। मैं अपनी अभिव्यक्ति में संपूर्ण नहीं हो पाई हूँ। अभी भी बहुत कुछ शेष है। गाँव का एक विशाल वटवृक्ष और उसकी जटाओं से लिपटी एक अबोध बच्ची, जिसे उस वटवृक्ष में अपने अपने पूर्वजों, पुरोधाओं का स्नेह और आशीर्वाद मिलता है, जिसे इस बात की निश्चिन्तता है कि कितनी भी बड़ी कठिनाई या आपदा आए, कितने भी झंझावात आएँ, विपरीत से विपरीत विषम परिस्थितियाँ आएँ यह वटवृक्ष उसे सुरक्षित और संरक्षित कर लेगा।