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Abhishek Singh

जिन्दगी
जिन्दगी
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मां

By Abhishek Singh in Poetry | Reads: 161 | Likes: 1

माँ भगवान का दूसरा रूप है,  मैं उस भगवान का एक अंश हूँ,  माँ तुम फिक्र करती हो,  प्यार बरसाती हो । कभी सिखाती हो,    Read More...

Published on Mar 22,2020 06:56 PM

मासूम

By Abhishek Singh in Poetry | Reads: 134 | Likes: 1

लाल बत्ती पर हाथों में मासूमियत का कटोरा लिए हुए, कभी इस गाड़ी, कभी उस गाड़ी, के पीछे भागती वह जो अनजान थी अपने कल से, श  Read More...

Published on Mar 22,2020 06:54 PM

सच्चाई

By Abhishek Singh in Poetry | Reads: 123 | Likes: 0

आजकल यह जो प्यार है, एक दिखावा है। प्यार से खेलने वाले... कुछ जो हवसी हैं। वे तो जिस्मों के भूखे हैं। _____________ आए दिन सरे ब  Read More...

Published on Mar 22,2020 06:52 PM

बनारस

By Abhishek Singh in Poetry | Reads: 218 | Likes: 1

प्रिये.. जब मैं प्रेम से थक जाऊंगा तब मैं उसी अस्सी में मिलूंगा जहाँ तुलसी ने रचा था महाकाव्य, और हमनें बनाये थे प्रे  Read More...

Published on Mar 22,2020 06:48 PM

बनारस

By Abhishek Singh in Poetry | Reads: 224 | Likes: 1

प्रिये.. जब मैं प्रेम से थक जाऊंगा तब मैं उसी अस्सी में मिलूंगा जहाँ तुलसी ने रचा था महाकाव्य, और हमनें बनाये थे प्रे  Read More...

Published on Mar 22,2020 06:47 PM

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