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hanamant rajaram yadav

जलता ईमान।

By hanamant rajaram yadav in Poetry | Reads: 88 | Likes: 1

ये कैसी आयी आफत, के पाणी भड़क भड़क के जलने लगा। हवा में उछला समंदर, और ईन्सान ईन्सान से जलने लगा। वो किताबों में कैद   Read More...

Published on Apr 5,2020 01:19 AM

इन्सानियत

By hanamant rajaram yadav in Poetry | Reads: 90 | Likes: 0

जलती है तो जलने दो , वो जिंदा कहा है।... लाश ही तो है इन्सानियत , वो जिंदा कहा है।... कितने अरसे बीत गए,  एक लब्ज न देखा सा  Read More...

Published on Apr 4,2020 07:38 PM

भारत...

By hanamant rajaram yadav in Poetry | Reads: 91 | Likes: 1

भारत।... मैं वो हूं, जो आसमान को जमीं में दफन कर डालू।... खिलाफ जो उठे कोयी, तो उसे खाक कर डालू।... दाये बाये रहते हैं, मेरे   Read More...

Published on Apr 4,2020 07:26 PM

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