#National Writing Competition

Vidhi Wadhwa

प्यार तो प्यार होता है

By Vidhi Wadhwa in Poetry | Reads: 151 | Likes: 1

प्यार तो प्यार होता है ज़िन्दगी गुजरने को तो अकेली भी गुजर जाए, पर किसी का साथ हो तो मज़ा आ जाए। सबको नहीं मिलता है   Read More...

Published on May 7,2020 12:09 PM

तुम लड़के हो !!

By Vidhi Wadhwa in Poetry | Reads: 135 | Likes: 1

तुम लड़के हो, तो लड़कियो जैसे रो क्यों रहे हो? तुम लड़के हो, तो बाहर जाओ खेलो लड़कियो की तरह खाना क्यों बना रहे हो? तुम   Read More...

Published on Apr 11,2020 07:22 PM

क्यों?

By Vidhi Wadhwa in Poetry | Reads: 128 | Likes: 0

क्यों है हमारी ये दशा? क्यों मिलती है हमें ये सजा? क्यों ये दरेंदे घूम रहे खुला? क्यों नहीं समझाया जाता उन्हें? क्यों   Read More...

Published on Apr 11,2020 06:58 PM

पुलवामा

By Vidhi Wadhwa in Poetry | Reads: 154 | Likes: 1

हुआ था कुछ ऐसा जिसकी वजह से, गगन रोया भी और धरती कपकपाई भी। 14.2.19 थी वो तारीख, दिन था  वो गुरुवार का। मां रसोई में खाना ब  Read More...

Published on Apr 5,2020 06:38 PM

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