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shaik mohammed mugnee

रात ढलने लगी है

By shaik mohammed mugnee in Poetry | Reads: 110 | Likes: 0

रात ढलने लगी है सेहर होने लगा है  चैन खोने लगी है ज़ख्म बढ़ने लगा है बाते कम हो रही है सनम चुप रहने लगा है जुनून कुछ बद  Read More...

Published on Jun 15,2020 11:32 PM

कैसे बताऊ

By shaik mohammed mugnee in Poetry | Reads: 99 | Likes: 0

कैसे बताऊ के तुम मुझे क्या हो  कहु के तुम मेरी चलती साँसों की वजा हो या फिर मैं खुशी से काटू ऐसी सजा हो  हर बार दिल   Read More...

Published on Jun 14,2020 01:05 AM

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