#National Writing Competition

ashok rana

तुम

By ashok rana in Poetry | Reads: 94 | Likes: 0

क़भी-क़भी सोचता हूँ के तुम सच में हो... या कहीं मैं..ख़्वाब ही में तो नहीं हूँ, के किस तरह तेरा यक़ीन करूँ के तुझे.. याद भी तो न  Read More...

Published on Jun 20,2020 05:52 PM

मैं तुम औऱ बारिश की बूँदें

By ashok rana in Poetry | Reads: 140 | Likes: 0

क़भी तुमनें देखा है गौर से  बादल की बरसती बूंदों को.., जब यह बिछुड़ती हैं ना अपने प्रियबर से...,   तो असंख्य पल-असंख्य य  Read More...

Published on Jun 20,2020 05:49 PM

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