दर्द में झुलसा हुआ मन, और चेहरे पर धुँआ
है जहाँ मुट्ठी में फिर भी, लोग तनहा हैं यहाँ
कहने को तो हैं हज़ारों लोग और रिश्ते तमाम
पर अंधेरे में उजाले के लिए जाएँ कहाँ
कौन
आज़ादी का अमृत बरसे
तम-मन गंगा हो
हर घर पे तिरंगा हो
घर-घर पे तिरंगा हो
पूरब-पश्चचिम-उत्तर-दक्षिण
हर ओर तिरंगा लहराए
धरती से लेकर अंबर तक
बस तीन रंग में रगं जा
दर्द में झुलसा हुआ मन, और चेहरे पर धुआँ
है जहां मुट्ठी में फिर भी, लोग तनहा हैं यहाँ
कहने को तो हैं हज़ारों लोग और रिश्ते तमाम
पर अंधेरे में उजाले के लिए जाएँ कहाँ
कौन
ज़िंदा दिखते, मगर मरे हैं ये
कुछ लगाकर, हरे-हरे हैं ये
मीठी बातों से संभलकर रहिए
मन में कड़वा जहर भरे हैं ये
गले लगकर के गला काटेंगे
घात विश्वास में करे हैं ये
म