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"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Pal
दर्द में झुलसा हुआ मन, और चेहरे पर धुँआ
है जहाँ मुट्ठी में फिर भी, लोग तनहा हैं यहाँ
कहने को तो हैं हज़ारों लोग और रिश्ते तमाम
पर अंधेरे में उजाले के लिए जाएँ कहाँ
कौन
दर्द में झुलसा हुआ मन, और चेहरे पर धुँआ
है जहाँ मुट्ठी में फिर भी, लोग तनहा हैं यहाँ
कहने को तो हैं हज़ारों लोग और रिश्ते तमाम
पर अंधेरे में उजाले के लिए जाएँ कहाँ
कौन है जो मन लगाकर के पढ़े मन की किताब
कौन है दिल से सुने जो टूटे दिल की दास्तां
हैं ये नकली फूल या कागज़ के नकली फूल हैं
अब यहाँ पहले-सी मंडराती नहीं हैं तितलियाँ
या ख़ुदा क्या हो गया है, आजकल इन्सान को
आदमीयत की चिता पर, आदमी की रोटियाँ
आज़ादी का अमृत बरसे
तम-मन गंगा हो
हर घर पे तिरंगा हो
घर-घर पे तिरंगा हो
पूरब-पश्चचिम-उत्तर-दक्षिण
हर ओर तिरंगा लहराए
धरती से लेकर अंबर तक
बस तीन रंग में रगं जा
आज़ादी का अमृत बरसे
तम-मन गंगा हो
हर घर पे तिरंगा हो
घर-घर पे तिरंगा हो
पूरब-पश्चचिम-उत्तर-दक्षिण
हर ओर तिरंगा लहराए
धरती से लेकर अंबर तक
बस तीन रंग में रगं जाए
कुछ ऐसा काम करें मिलकर
सब चंगा-चंगा हो....
हर-घर पे तिरंगा हो
घर-घर पे तिरंगा हो..
दर्द में झुलसा हुआ मन, और चेहरे पर धुआँ
है जहां मुट्ठी में फिर भी, लोग तनहा हैं यहाँ
कहने को तो हैं हज़ारों लोग और रिश्ते तमाम
पर अंधेरे में उजाले के लिए जाएँ कहाँ
कौन
दर्द में झुलसा हुआ मन, और चेहरे पर धुआँ
है जहां मुट्ठी में फिर भी, लोग तनहा हैं यहाँ
कहने को तो हैं हज़ारों लोग और रिश्ते तमाम
पर अंधेरे में उजाले के लिए जाएँ कहाँ
कौन है जो मन लगाकर के पढ़े मन की किताब
कौन है दिल से सुने जो, टूटे दिल की दासतां
है ये असली फूल या कागज़ के नकली फूल हैं
अब यहाँ पहले सी मंडराती नहीं हैं तितलियाँ
यहा ख़ुदा क्या हो गया है, आजकल इन्सान को
आदमीयत की चिता पर, आदमी की रोटियाँ
ज़िंदा दिखते, मगर मरे हैं ये
कुछ लगाकर, हरे-हरे हैं ये
मीठी बातों से संभलकर रहिए
मन में कड़वा जहर भरे हैं ये
गले लगकर के गला काटेंगे
घात विश्वास में करे हैं ये
म
ज़िंदा दिखते, मगर मरे हैं ये
कुछ लगाकर, हरे-हरे हैं ये
मीठी बातों से संभलकर रहिए
मन में कड़वा जहर भरे हैं ये
गले लगकर के गला काटेंगे
घात विश्वास में करे हैं ये
मन मुताबिक हैं आपकी बातें
हैं ये जुमले, या मसख़रे हैं ये
हैं आलीशान पर बहोत सूने
ये महल हैं, कि मकबरे ये
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