Experience reading like never before
Sign in to continue reading.
इस किताब “ज़िंदगी का सफर” में उम्र के तीनों पड़ावों का समावेश है। बचप्पन से लेकर बुढ़ापे तक , एक सफर ही है जो तय करना है। इस सफऱ में माँ-बाप, दोस्ती, रिश्तेदारी और इन सबका प्या
इस किताब “ज़िंदगी का सफर” में उम्र के तीनों पड़ावों का समावेश है। बचप्पन से लेकर बुढ़ापे तक , एक सफर ही है जो तय करना है। इस सफऱ में माँ-बाप, दोस्ती, रिश्तेदारी और इन सबका प्यार, सारा एक भावनात्मक पहलु है। इसमें गम- खुशी, सुख-दुख, दर्द मर्ज़ , महफिल-तनहाई सबको शब्दों के सांत्वना में पिरोया हुआ है।
आपको इन शब्दों में वोह मिले जिससे आपका सफर जुड़ा हआ है।
ज़िंदगी का सफर है ग़ालिब
इस मोड़ से शुरु हुआ तो क्या
किसी मोड़ पर इसका अंत है
अरमान और उसका बापू खुशहाल सिंह दिन भर दोनो खेत में काम कर रहे थे। उनका घऱ छोटा सा पत्थरों और लकड़ियों से बना हुआ था। Read More...
Are you sure you want to close this?
You might lose all unsaved changes.
The items in your Cart will be deleted, click ok to proceed.