यह छंद काव्य संग्रह ‘‘रोम-रोम राम’’ छंद विधान की विभिन्न विधाओं का एक ऐसा सुमनगुच्छ है, जिसमें छंद विधान की उन विधाओं पर विशेष बल दिया गया है, जो वर्तमान में सामान्य रूप से प
‘‘नदी के दो किनारे’’ मुक्तकों का एक चुना हुआ गुलदस्ता है। यह समाज के लिए अधिक उपयुक्त सिद्ध होगा क्योंकि इसमें उत्तरोत्तर दृश्यों द्वारा संगठित पूर्ण जीवन या उसके किसी प
ग़ज़ल संग्रह ‘‘ख़ूनी प्यास का पत्थर’’ में शायर अपने अशआर में कभी महबूब की प्रशंसा करते नजर आता है, तो कभी समाज से कुरीतियाँ मिटाने के लिए शिक्षक की भूमिका में खड़ा दिखाई देता ह
छंदमुक्त विधा की इस कृति घुटता नहीं क्या दम? में अनेकानेक विशेषताएं आंख.मिचौनी की क्रीड़ा करती नजर आएँगी। शीर्षक के सामने आते ही रचनाकार की सामाजिक सरोकारों से जुड़ी दृष्टि का ध
प्रस्तुत गीत संग्रह ‘‘मेरे मन के वीराने में‘‘ गीतों केी भाव प्रवण संचेतना का सुन्दर-सा सुमनगुच्छ है जिसे पढ़कर पाठकों की चेतना विभिन्न भावुक सुरभित वीथियों में विचरण करन