मनीषी पण्डित श्री जनार्दन राइ नागर द्वारा रचित 'राम-राज्य' ग्रन्थावली पाँच उपन्यासों का संकलन है - 'हनुमान', 'सुग्रीव', 'भारत-शत्रुघ्न', 'सीता-राम' एवं 'राम-लक्ष्मण'। इनकी विशेषता है
पं. जनार्दन राय नागर द्वारा सृजित ‘राम-राज्य’ उपन्यास की श्रृंखला में ‘सीता-राम’ उपन्यास भारतीय संस्कृति के आदर्श नायक राम तथा उनकी पत्नी सीता के प्रमुख जीवन प्रसंगों का अद्भु
मनीषी पण्डित श्री जनार्दन राइ नागर द्वारा रचित 'राम-राज्य' ग्रन्थावली पाँच उपन्यासों का संकलन है - 'हनुमान', 'सुग्रीव', 'भारत-शत्रुघ्न', 'सीता-राम' एवं 'राम-लक्ष्मण'। इनकी विशेषता है
पं. जनार्दन राय नागर द्वारा सृजित ‘राम-राज्य’ उपन्यास की श्रृंखला में ‘सीता-राम’ उपन्यास भारतीय संस्कृति के आदर्श नायक राम तथा उनकी पत्नी सीता के प्रमुख जीवन प्रसंगों का अद्भु
इस उपन्यास में राम के वन गमन के पश्चात् भरत एवं शत्रुघ्न को अलौकिक भातृत्व प्रेम की प्रतिमूर्ति के रूप में ही प्रतिष्ठित किया गया है। भरत राम को चित्रकूट मनाने जाते हैं। राम मान
इस उपन्यास में सुग्रीव एक धीर-गम्भीर चिन्तक के रूप में दर्शाये गये हैं। वानर संस्कृति का प्रतीक ‘‘सुग्रीव उपन्यास’’ के प्रारम्भ में असहाय, भयभीत, ईर्षालु एवं राज्यलिप्सा से भर
पण्डित जनार्दन राय नागर द्वारा जगद्गुरु शंकराचार्य पर सृजित महा उपन्यास की अन्तिम कड़ी है- ‘‘महाप्रयाण’’। यह दसवां उपन्यास जगद्गुरु की सम्पूर्ण जीवन यात्रा एवं उससे भारत के सा
पण्डित जनार्दन राय द्वारा रचित वृहत् उपन्यास ‘‘जगद्गुरू शंकराचार्य’’ के 10 भागों में से अन्तिम चरण की ओर अग्रसित ‘‘ज्योतिर्मठ’’ अत्यधिक महत्वपूर्ण कड़ी है। इस पुस्तक में पांचर
जगद्गुरु शंकराचार्य पर सृजित उपन्यासों की श्रृंखला में ‘द्वारका मठ’ जनार्दनराय नागर द्वारा सृजित अत्यधिक चर्चित उपन्यास है।
इस उपन्यास में रामेश्वर की ओर प्रयाण करते समय
पण्डित जनार्दन राय नागर द्वारा रचित ‘गोवर्धन मठ’ उपन्यास उनके द्वारा जगद्गुरु शंकराचार्य पर सृजित दस उपन्यासों में से एक है। इस उपन्यास में समसामयिक राजनीति, सामाजिक अन्तर्
पण्डित जनार्दन राय नागर द्वारा रचित ‘श्रृंगेरीमठ’ उपन्यास उनके द्वारा जगद्गुरू शंकराचार्य पर सृजित दस उपन्यासों में से एक है। इसमें शंकराचार्य की दिग्विजय का वर्णन है। शंकर
मनीषी पण्डित श्री जनार्दन राय नागर द्वारा जगद्गुरु शंकराचार्य पर सृजित दस उपन्यासों में से ‘‘शंकर-शास्त्रार्थ’’ सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। क्योंकि शास्त्रार्थ में मण्डन मिश्
मनीषी पण्डित श्री जनार्दन राय द्वारा जगद्गुरु शंकराचार्य पर सृजित दस उपन्यासों में से ‘‘शंकर-शास्त्रार्थ’’ सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। क्योंकि शास्त्रार्थ में मण्डन मिश्र पर व
मनीषी पं. जनार्दनराय नागर द्वारा रचित जगद्गुरु शंकराचार्य उपन्यास श्रृंखला में यह 'शंकर-सन्देश' है। महर्षि बादरायण के सन्देशानुसार शंकर ने सच्चिदानन्द स्वरूप में सन्देश दिया
जगद्गुरू शंकराचार्य- शंकर के जीवन वृत को आधार बनाकर पण्डित जनार्दन राय नागर द्वारा लिखे गये दस उपन्यासों में यह ‘‘शंकर साक्षात्’’ है। इस उपन्यास का कथानक आत्म जन्य है। जिसमें ज
‘‘जगद्गुरू शंकराचार्य’’- शंकर के जीवन वृत्त को आधार बनाकर पण्डित जनार्दन राय नागर द्वारा लिखे गये दस उपन्यासों में से यह ‘‘शंकर-दीक्षा’’ है। दीक्षा लेने के लिए गुरू गोविन्द के
‘‘जगद्गुरू शंकराचार्य’’ शंकर के जीवन वृत्त को आधार बनाकर लिखा गया पण्डित जनार्दन राय नागर के इस उपन्यास का नाम ‘‘शंकर-सन्यास’’ है। बाल्यावस्था से ही अपने चमत्कारों के कारण शं
इस उपन्यास में ‘हनुमान’ एक अलौकिक पात्र के रूप में दशार्य गये हैं। ‘‘यह क्या पार्थिव शिशु हैं? नहीं, केसरी!... यह आञ्जनेय, केसरीनन्दन, निस्संदेह सभी देवताओं और शक्तियों के पुंज सा