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"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palपंकज बरनवाल एक संवेदनशील चिंतक, समाज के प्रति प्रतिबद्ध कर्मयोगी तथा बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी लेखक हैं। उन्होंने प्रतिष्ठित विधि शिक्षण संस्थान, विधि संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (वाराणसी) से विधि में स्नातक और मध्य प्रRead More...
पंकज बरनवाल एक संवेदनशील चिंतक, समाज के प्रति प्रतिबद्ध कर्मयोगी तथा बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी लेखक हैं। उन्होंने प्रतिष्ठित विधि शिक्षण संस्थान, विधि संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (वाराणसी) से विधि में स्नातक और मध्य प्रदेश के जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, जबलपुर से प्रबंधन में स्नातकोत्तर (एम.बी.ए.) की शिक्षा प्राप्त की है l जिससे उनके व्यक्तित्व में विधि और प्रबंधन—दोनों का संतुलित एवं व्यावहारिक समन्वय दिखता है।
अपने पेशेवर जीवन में पंकज बरनवाल सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समुदाय विकास के क्षेत्र में समृद्ध एवं विविध अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारत की शासन व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र के सहयोग से अनेक जटिल सामाजिक समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी कार्यशैली में संवाद, समन्वय, नीति-समझ और जमीनी यथार्थ का गहन ज्ञान स्पष्ट रूप से झलकता है।
सामुदायिक समस्याओं के समाधान, परियोजना प्रबंधन तथा संगठनात्मक विकास जैसे विषयों में उनकी दक्षता उन्हें एक प्रभावी सामाजिक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करती है। वे समाज के वंचित और हाशिये पर खड़े वर्गों की आवाज़ को व्यवस्था तक पहुँचाने में निरंतर सक्रिय रहे हैं।
साहित्य और प्रकृति के प्रति उनका गहरा अनुराग उनके व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण पक्ष है। पक्षी अवलोकन (बर्ड वॉचिंग) उनके लिए केवल एक शौक नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ आत्मीय संवाद का माध्यम है। साथ ही, हिन्दी साहित्य—विशेष रूप से उपन्यास पढ़ना उन्हें विचार, संवेदना और सृजनात्मक ऊर्जा प्रदान करता है, जिसका प्रभाव उनके लेखन और सामाजिक दृष्टिकोण में स्पष्ट दिखाई देता है।
पंकज बरनवाल का लेखन और सामाजिक कर्म, दोनों ही मानवीय मूल्यों, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की भावना से प्रेरित हैं। वे अपने अनुभवों, विचारों और संवेदनाओं के माध्यम से समाज को एक अधिक जागरूक, संवेदनशील और न्यायपूर्ण दिशा में ले जाने का सतत प्रयास करते हैं। उनका पत्राचार पता – रमा भवन, रमना रोड, गया – ८२३००१, बिहार , ईमेल - [link removed]
Pankaj Baranwal is a writer, social practitioner, and sensitive thinker whose work reflects a deep commitment to human values, social justice, and inclusive development. He holds a Bachelor’s degree in Law from the Faculty of Law, Banaras Hindu University (Varanasi), and a postgraduate degree in Management (MBA) from the Xavier Institute of Management, Jabalpur. This interdisciplinary academic foundation enables him to approach social challenges with a balanced blend of legal insight, managerial acumen, and practical realism.
Professionally, he has been actively engaged in the field of community development, working closely with governance and administrative systems in India to address complex social issues. His work spans community problem-solving, project management, and organizational development, through which he has consistently advocated for marginalized and underserved communities. His approach is marked by dialogue, coordination, policy awareness, and a strong understanding of grassroots realities.
Beyond his professional engagements, literature and nature occupy a central place in his life. An avid reader of Hindi literature—particularly novels—he draws intellectual depth and emotional sensitivity from literary traditions. Birdwatching is both a personal passion and a means of connecting intimately with the natural world, enriching his reflective and creative outlook.
Pankaj Baranwal’s writing and social work together embody a sustained effort to foster a more aware, compassionate, and equitable society. Through his experiences and thoughtful expression, he continues to contribute meaningfully to contemporary social discourse.
Correspondence Address:
Rama Bhavan, Ramna Road, Gaya – 823001, Bihar
Email: [link removed]
क्या हर प्रेम का अर्थ साथ होना ही होता है?
रोनित (राम) और सीता—दो अलग-अलग संसारों में जीते हुए दो संवेदनशील मन।
एक शिकायत से शुरू हुआ संवाद कब आत्मिक निकटता में बदल जाता है, यह उ
क्या हर प्रेम का अर्थ साथ होना ही होता है?
रोनित (राम) और सीता—दो अलग-अलग संसारों में जीते हुए दो संवेदनशील मन।
एक शिकायत से शुरू हुआ संवाद कब आत्मिक निकटता में बदल जाता है, यह उन्हें भी पता नहीं चलता।
दूरी है, जिम्मेदारियाँ हैं, समाज की सीमाएँ हैं—
फिर भी एक ऐसा भाव है, जो बिना अधिकार माँगे, बिना वादों के, चुपचाप जीवित रहता है।
यह उपन्यास उस प्रेम की कहानी है
जो मिलन से अधिक समझ में विश्वास करता है,
जो पाने से पहले सम्मान करना सिखाता है,
और जो अंत में एक कठिन प्रश्न छोड़ जाता है—
क्या सच्चा प्रेम वही है जो साथ रहे,
या वही जो दूर रहकर भी किसी की भलाई चाहे?
यह कहानी सिर्फ़ प्रेम की नहीं,
मनुष्य बने रहने की एक शांत, गहरी यात्रा है।
क्या हर प्रेम का अर्थ साथ होना ही होता है?
रोनित (राम) और सीता—दो अलग-अलग संसारों में जीते हुए दो संवेदनशील मन।
एक शिकायत से शुरू हुआ संवाद कब आत्मिक निकटता में बदल जाता है, यह उ
क्या हर प्रेम का अर्थ साथ होना ही होता है?
रोनित (राम) और सीता—दो अलग-अलग संसारों में जीते हुए दो संवेदनशील मन।
एक शिकायत से शुरू हुआ संवाद कब आत्मिक निकटता में बदल जाता है, यह उन्हें भी पता नहीं चलता।
दूरी है, जिम्मेदारियाँ हैं, समाज की सीमाएँ हैं—
फिर भी एक ऐसा भाव है, जो बिना अधिकार माँगे, बिना वादों के, चुपचाप जीवित रहता है।
यह उपन्यास उस प्रेम की कहानी है
जो मिलन से अधिक समझ में विश्वास करता है,
जो पाने से पहले सम्मान करना सिखाता है,
और जो अंत में एक कठिन प्रश्न छोड़ जाता है—
क्या सच्चा प्रेम वही है जो साथ रहे,
या वही जो दूर रहकर भी किसी की भलाई चाहे?
यह कहानी सिर्फ़ प्रेम की नहीं,
मनुष्य बने रहने की एक शांत, गहरी यात्रा है।
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