Usha Dhar
श्रीमती ऊषा धर ने रेलवे से सेवनिवृत्ति के पश्चात अपनी विभिन्न देशों की यात्रा के दौरान महसूस किया कि भारत एवं अन्य देशों में बहुत से लोग अस्वास्थ्यकर जीवनशैली के कारण विभिन्न रोगों से ग्रसित हो रहे हैं। तब आपने अपने अग्रज द्वाराRead More...
श्रीमती ऊषा धर ने रेलवे से सेवनिवृत्ति के पश्चात अपनी विभिन्न देशों की यात्रा के दौरान महसूस किया कि भारत एवं अन्य देशों में बहुत से लोग अस्वास्थ्यकर जीवनशैली के कारण विभिन्न रोगों से ग्रसित हो रहे हैं। तब आपने अपने अग्रज द्वारा बंगला भाषा में रचित रवीन्द्र पुरस्कार प्राप्त “सुखासने सुखाहार” को हिन्दी में अनुवाद करने का निर्णय लिया ताकि यह पुस्तक अधिकतम लोगों तक पहुँचे। यह पुस्तक लोगों को न केवल एक स्वास्थ्यकर जीवनशैली से परिचित कराएगी बल्कि खाद्य के बारे में बहुत से भ्रांतियों को भी दूर करेगी।
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