হিন্দি

बेख़ौफ़
By Mayank Manohar in Poetry | পড়ার জন্য : 1,079 | পছন্দ: 0
Yesterday evening I was on my terrace when I saw a eagle flying fearlessly in the blue sky. I also saw and captured a Air India flight passing by with probably essential medical supplies. Seeing them, I write a poem to inspire everyone to chase their dreams fearlessly. The poem is titled - बेख  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে May 4,2020 11:21 PM
मेरे मीत
By Mayank Manohar in Poetry | পড়ার জন্য : 913 | পছন্দ: 0
Difficult times like these are the perfect ones to express your gratitude to your best friend who has stood by you like a rock no matter what the situation has been.To my best friend and to all friendships this is my heart felt poem titled - मेरे मीत मेरे मीत:  म  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে May 4,2020 11:27 PM
छुटकारा
By Udit in Poetry | পড়ার জন্য : 909 | পছন্দ: 0
समय नहीं कि अब मैं तुझे याद करूं यादें नहीं अब जिसके मैं साथ चलूं ख़त्म हुआ ये अब सिलसिला यहीं जो मिलना कभी तो कोई शि  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে May 5,2020 02:28 AM
Akhri Mulakat
By Rajashree Konwar in Poetry | পড়ার জন্য : 252 | পছন্দ: 0
Shayad hi yaad ho tumhe jab tum ayi thi pyar radd karne..  Aur main gaya tha us fesle ko mansookh karne teri baaton se.. Par teri baaton me hichkichahat toh thi hi nahi.. Ki mere iraadon ko paanah mile.. Kya haq nahi banta tha mera ki ek bar aas lagau? Achanak khich tujhe pas, zor se gale lagau  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে May 5,2020 09:06 AM
Mujhe Pata Hai
By Rajashree Konwar in Poetry | পড়ার জন্য : 324 | পছন্দ: 0
Ab koyi mujhe nahi puchta, Ki woh kesi hai.. Naa koi jawab k intezar me rukta hai.. Numaaesh tere baaton ki ab nahi hoti.. Na ab kisike lafzo me tera zikr hota hai..  Saare salaah ab paardon me ked hai Tujhe bulane ko naa kehta ab koi.. Beparwaah k badal ab chaat chuke hai Kyunki sab ko malum h  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে May 5,2020 09:08 AM
कलयुग
By Shirsath Samiksha in Poetry | পড়ার জন্য : 826 | পছন্দ: 0
कलयुग... ये दौर है कलयुग का जनाब,  यहां सच्चाई की बात ना करो... हर जगह झूठ की ही मुहर है सच की वहां कोई औकात नहीं है  ज़  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে May 5,2020 11:37 AM
प्रेम की चिड़िया
By saurabh saroj in Poetry | পড়ার জন্য : 540 | পছন্দ: 1
1-आओ हम बच्चे भारत के, भारत को हम स्वर्ग बनाएं। प्रेम प्रीत की भाषा बोले, सोने की चिड़िया बन जाए।। 2- फंख इसके मत नोचो भ  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে May 5,2020 11:51 AM
प्रेम की सबरी
By saurabh saroj in Poetry | পড়ার জন্য : 989 | পছন্দ: 0
1-मन में एक संकल्प लिए तुम, निसदिन पथ पर बढ़ते जाना। प्रेम को पीछे मत छोड़ देना, इसे बोलते गाते जाना।। 2- प्यार किया तो   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে May 5,2020 12:05 PM
प्रेम की मीरा
By saurabh saroj in Poetry | পড়ার জন্য : 493 | পছন্দ: 0
1-मैं दीवानी श्याम जी की, बांसुरी की धुन -धुन में। पा जाऊं मैं वो मोहन, तेरी उस प्रेम भाव को।। 2- तुम मेरे आगत पीछे, हर पल   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে May 5,2020 12:27 PM
❤️ Ek Tarfa Pyar...
By Harshraj Singh Rathode in Poetry | পড়ার জন্য : 827 | পছন্দ: 1
अनकही बात हो तुम , कैसे कहूं मेरे जज़्बात हो तुम, की लिखें जो मेने शब्द तुम पर उसके शब्दार्थ कहा से लाऊ, अब अपनी दिल की   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে May 5,2020 01:50 PM
ढूंढ लो मुझे
By Trisha Abhay in Poetry | পড়ার জন্য : 762 | পছন্দ: 2
गुम हूं कहीं मै इस भीड़ में ढूंढ लो मुझे, अनकही अनसुनी किस्सों में कैद हूं मैं, बंद अलमारी में रखी उस तस्वीर में बंधक   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে May 5,2020 02:11 PM
Kheer
By Darpan Chandalia in Poetry | পড়ার জন্য : 577 | পছন্দ: 0
Mene kitaabon K biich thodi jageh chod rkhi hai, taaki dhool jam sake wahan. Aur fir, Kaii umra paar, jab todun taala dil ki library ka.... us dhool Ki parat Ki motaii naap lun..... ye karke kya haasil hoga? ..yehi sawaal....yehi tha na tumhara... mera iraada to bas us jharokhe se,  tumhe ki  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে May 5,2020 04:01 PM
Kaun Hun Mein
By savita Kapoor in Poetry | পড়ার জন্য : 385 | পছন্দ: 0
Kaun Hun Mein???  Kaun Hun mein, Ek adhuri kavita, ya ek behti Sarita, antheen si, behti viheen si, rangheen, sangeen si.  Behti Si Sarita, jo Kabhi keh na payi apni kavita.  Kaun Hun mein?? Parchayi si, Parai si.  Kaun Hun mein??  Behti Sarita Ya ankhi Kavita??  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে May 5,2020 04:21 PM
आज बड़े दिनों बाद घर पर अखबार आई
By Abhinivesh in Poetry | পড়ার জন্য : 1,410 | পছন্দ: 0
आज बड़े दिनों बाद घर पर अखबार आई चाय की चुस्की लेते हुए दादाजी के चेहरे पर मुस्कान आयी... बिस्किट दादी को थमा कर उन्ह  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে May 5,2020 05:58 PM
लिखे हैं मैंने ख़त तुम्हें वक़्त मिले तो पढ़ लेना
By Nilesh Sankrityayan in Poetry | পড়ার জন্য : 663 | পছন্দ: 0
लिखे हैं मैंने ख़त तुम्हें वक़्त मिले तो पढ़ लेना इनमें हर पल की याद है,हर याद के हिस्से हैं कुछ मेरे होठों की बात है,  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে May 5,2020 07:53 PM