बेटियां घर की शान होती बेटियां घर की लक्ष्मी होती है! और मेरी बेटी तो दुनिया सबसे प्यारी और अच्छी संस्कारी बेटी है! इसको सारी ख़ुशी मिले भगवन से यही प्राथना है, ये बात तो हर कोई करता है हर माँ बाप करते है!, बेटी को देवी तो बना देते है मगर उसको इंसान की तरह जीने तक नही देते है!, उसके ऊपर जरुरत से ज्यादा पाबंदियां लगा देते है, उसकी आज़ादी छीन लेते है! बंद कमरे में स्वर्ग देने की बात करने वाले उसी भावनाओ को उसके जीते जी मार देते है,
अक्सर ऐसा ही हमारे समाज में देखने को मिलता है!, बेटी घर की इज्जत है, कहते हुए उसको छिपा कर रखते है! अरे बेटी तो न देवी है न इज्जद न ही दौलत है, वो तो बस एक इंसान है! जिसके पास आपही की तरह कुछ सामन्य इच्छाये है! कुछ सपने है कुछ अरमान है जीने के लिए दुनिया में उनको भी आजादी का हक़ है,
क्यों उनके साथ कैदियों की तरह बर्ताव होने लगता है! देवी बोल कर सिर्फ बद कमरे में ही पूजा जाता है क्यों इस तरह के दोहरापन होता है! हमारे समाज में, जो की किसी भी बेटी के लिए सुखद नही होता है,
इन्हीं बातों को मध्य नजर रखते हुए मैंने इस किताब को लिखने का प्रयास किया ताकि और भी लोगों की कहानी कविता के माध्यम से और कुछ जा ना जा सके