अजय सिंह राणा कृत 'भीगे हुए ख़त' काव्य संग्रह की समस्त रचनाएँ उनके विरह की आँच में तपकर अहसासों से सिक्त अलग-अलग ऐसी भाव-छवियां प्रस्तुत करती हैं कि पाठक इनमें अपनी स्मृतियों व मनःस्थितियों का सह अस्तित्व तलाश करने लग जाता है। इन कविताओं में कवि का अपने प्रिय के प्रति समर्पण, हृदय के आईने में प्रेम की स्मृतियों की उन्मुक्त क्रीड़ाएँ, जज्बातों के तूफान से जनित उदासी व खमोशियाँ, उसके आगोश से दूर रहकर भी रिश्ते को निभाने की अकुलाहट, उसकी यादों की शरण में आकर कभी शीतलता का अनुभव तो कभी अजीब-सी बेचैनी और घुटन को कल्पना-लोक में भोगना आदि स्पष्ट दिखाई देता है।
'भीगे हुए ख़त' प्रेम के विरह पक्ष पर आधारित काव्य संग्रह है। विरह में लिखी कविताएँ आँसुओं में भीगे ख़त ही तो होते हैं जो कभी अपने चाहने वाले तक पहुंच नहीं पाते या उन्हें हम पहुंचा नहीं पाते। वैसे भी प्रेम में मंज़िल नहीं होती बल्कि एक सुंदर सफ़र होता है जिसमें जिस्म का होना मायने नहीं रखता। यह तो रूहों का सफ़र है जो अंतिम श्वास तक निरंतर चलता है। किसी को हासिल करने की जद्दोजहद को इश्क़ नहीं कहते बल्कि उसे पाए बिना ही उसका हो जाने को इश्क़ कहते हैं। यह किताब केवल किताब ही नहीं है बल्कि आँसू और स्याही का वह मिलन है जिससे इसके पृष्ठ रचे गए हैं। इसमें खारेपन के साथ बिछड़ने की टीस भी है लेकिन उसके न होकर भी होने का मीठा सुकून भी है। ये पन्ने वे ख़त हैं जिन पर आँसू रिस-रिसकर अपनी कहानी बयां करते हैं। अहसास में डूबे ये पन्ने आज भी भीगे हुए हैं। शब्दों की बुनावट चाहे जैसी भी हो लेकिन उनके अर्थ आज भी ज्यों के त्यों हैं जिनमें एक तलाश है जो शायद कभी खत्म न हो।
युवा कवि और उपन्यांसकार अजय सिंह राणा मूलत: हरियाणा प्रदेश के गांव गोंदर जिला करना से सम्बं्घ रखते हैं। उनका जन्मन 01.02.1979 को गांव गोंदर में हुआ लेकिन उनका पालन-पोषण और शिक्षा करनाल के घरौंदा शहर में हुई। वह 2005 से चंडीगढ़ शिक्षा विभाग में अध्यापक पद पर कार्यरत हैं। उनकी माता का नाम श्रीमती शकुंतला देवी और पिता का नाम श्री महेंद्र सिंह राणा है।
प्रकाशित पुस्तकें: उम्मीद के किनारे’ काव्य संग्रह-2013, खाली घरौंदे’ उपन्यास-2015, ‘तेरा नाम इश्क़्’ उपन्यास-2018, ‘भीगे हुए ख़तʼ काव्य संग्रह-2019 ‘सरगम द ट्यून्ड’ साझा काव्य संग्रह-2016 और 'मां' साझा काव्य संग्रह साहित्यपीडिया प्रकाशन -2019
शिक्षा: शिक्षा: एम.एस.सी जियोग्राफी, एम. ए. हिंदी और एम. ए. एजुकेशन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय हरियाणा, एम. ए. मनोविज्ञान इग्नू दिल्ली, पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन डिजास्टर मैनेजमेंट इग्नू दिल्ली, बैचलर डिग्री ऑफ एजुकेशन बी. एड. यूनिवर्सिटी ऑफ जम्मू और पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट ऑफ टीचिंग ऑफ इंग्लिश रीजनल इंस्टीट्यूट आफ इंग्लिश चंडीगढ़
सम्मान/ पुरस्कार:
1.संवेदना समर्पण हिंदी श्री सम्मान वी.एच.सी.ए.फ फाउंडेशन घरौंदा (करनाल हरियाणा) द्वारा हिंदी दिवस 14सितम्बर 2016 को साहित्य के क्षेत्र में ।
2.प्रथम उपन्यास ‘खाली घरौंदे’ वर्ष 2015 में चंडीगढ़ साहित्य अकादमी से बेस्ट पांडुलिपि पुरस्कार और वर्ष 2017 में हरियाणा साहित्य अकादमी से बेस्ट पांडुलिपि ‘रिश्तों का रेगिस्तान’ शीर्षक के तहत चयनित।
3.प्रथम काव्य संग्रह ‘उम्मीद के किनारे’ वर्ष 2013 में चंडीगढ़ साहित्य अकादमी से बेस्ट पांडुलिपि पुरस्कार
4.चंडीगढ़ लिटरेरी सोसाइटी के तत्वाधान में आयोजित कविता पाठ में पुरस्कार, वर्ष 2013
5.चंडीगढ़ लायंस क्लब की ओर से शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में बेस्ट टीचर प्रशस्ति पत्र पुरस्कार 2017
6.उपन्यास ‘तेरा नाम इश्क़ ’ 2018 में चंडीगढ़ साहित्य अकादमी से बेस्ट पांडुलिपि पुरस्कार
7.वी.एच.सी.ए. फाउंडेशन घरौंदा (करनाल -हरियाणा) द्वारा हिंदी दिवस 2018 पर उपन्यास ‘तेरा नाम इश्क़ʼ को सम्मान और विमोचन
9.राज्या स्तेरीय शिक्षक रत्नफ अवार्ड साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में – 2018
10.एशियन एक्सीलेंस अवार्ड साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में – 2019
11.ट्रिब्यून मॉड़ल स्कू्ल के हिंदी विभाग, वैरियर क्ब्स घरौंदा करनाल, पंजाब इंजीनीयरींग कॉलेज के हिंदी संपादकीय बोर्ड और साहित्यिक संस्थाब ‘सफ़र-ए-सुख़नʼ द्वारा ‘गेस्टी ऑफ ऑनरʼ
शोध कार्य : कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी हरियाणा द्वारा मेरे उपन्यास ‘खाली घरौंदें’ पर लघु शोध प्रबंध 2016
वर्तमान पता : मकान न. 418 ग्राऊंड़ फलोर सैक्टार 33- ए चंडीगढ़ पिन कोड़ 160020
दूरभाष-91-9888719827, +91-7009348987, ईमेल -ranageographer@gmail.com