एक कोशिश ऐसे भी “अल्पांजलि” दोहा संग्रह को पिछली पुस्तक कुछ दिल ने कहा अल्पांजलि हिंदी नज़्म - के भावो को दोहा छंद में पिरोने का काम कहा जाए तो गलत नहीं होगा I तकरीबन बहुत से लमहे उसी भाव के साथ कैद किये है पहले नज़्मों में अब दोहों में I भले ही नज़्मों की पुस्तक पहले आई हो लेकिन लिखते हुए कभी दोहे पहले लिखे गए कभी नज़्म और कभी कभी तो दोनों ही एक साथ लिखे गए होंगे I