ख़ाली घरौंदे उपन्यास अजय सिंह राणा का पहला उपन्यास है जिसे चंडीगढ़ साहित्य अकादमी ने वर्ष 2015 बेस्ट पांडुलिपि चयनित किया था। यह एक भावुक उपन्यास है जिसमें रिश्तो के बिखराव पर कथानक टिका है। आकाश और काजल के माध्यम से यह कहानी पाठकों के दिल को छू जाती हैं। यह उन दोनों के संघर्ष की कहानी है। 'ख़ाली घरौंदे', का असर उन कलात्मक फिल्मों की तरह है, जिनके समाप्त हो जाने के बाद भी आप कुछ पल आँखें मूँद चुपचाप बैठे रहना चाहते हैं। उस समय या तो आप उन क्षणों को जी रहे होते हैं या उन पर गहन चिंतन करना चाहते हैं। अजय सिंह राणा द्वारा लिखित यह उपन्यास न केवल मस्तिष्क को बुरी तरह से झिंझोड़ता है बल्कि कई स्थानों पर अनजाने में आपके जीवन के पृष्ठ भी पलटता चलता है। यही उनकी लेखनी की सफ़लता और सार्थकता भी है।
जैसे-जैसे आकाश, काजल, कोमल, कपिल के चरित्रों से आपका साक्षात्कार होता है, ह्रदय उन्हें आसपास ही महसूस करता है। इस उपन्यास की विषयवस्तु ही ऐसी है कि पात्रों से जुड़ी कई घटनाएँ आपबीती लगती हैं, यहाँ तक कि कई स्थानों पर मुख्य पात्र भी चेहरे के साथ ही नज़र आते हैं। आख़िर यही तो है ज़िंदगी! तमाम संघर्षों और उदासियों के बीच कुछेक हँसी के पल और उम्र भर का मलाल!