You cannot edit this Postr after publishing. Are you sure you want to Publish?
Experience reading like never before
Read in your favourite format - print, digital or both. The choice is yours.
Track the shipping status of your print orders.
Discuss with other readersSign in to continue reading.

"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Pal"मेरी दिव्य दृष्टि की यात्रा – भाग 1" एक आत्मकथात्मक और रहस्यपूर्ण यात्रा है, जो आपको एक साधारण व्यक्ति से लेकर एक साधक तक के गहन अनुभवों में ले जाती है। यह सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि चेतना की परतों को खोलती एक जीवंत अनुभूति है। इसमें तीसरी आँख (Third Eye), सूक्ष्म शरीर, देवी-देवताओं के दर्शन, मंत्रों की शक्ति, और ईश्वर से जुड़ने के असली अनुभवों को सरल, भावनात्मक और आत्मिक भाषा में साझा किया गया है।
लेखक ने कैसे अपने पुत्र के माध्यम से दिव्य दृष्टि के द्वार खोले, कैसे साधना, हवन, मंत्रजाप, और स्वयं के विश्वास से उन्होंने आत्मा की गहराइयों को स्पर्श किया — यह सब बेहद सहज और सच्चे अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया है। हर अध्याय एक नए द्वार की तरह है, जहाँ पाठक खुद को उस अनुभव में डूबा हुआ पाता है।
यदि आप आध्यात्मिक खोज में हैं, या स्वयं को समझने की यात्रा पर हैं — तो यह पुस्तक आपका दर्पण बन सकती है।
यह भाग पहला है — एक आरंभ, जो आपके अंतर्मन के द्वार खोल सकता है।
It looks like you’ve already submitted a review for this book.
Write your review for this book (optional)
Review Deleted
Your review has been deleted and won’t appear on the book anymore.ऋषि रोहित शर्मा
ऋषि रोहित शर्मा एक प्रखर चिंतक, आध्यात्मिक अन्वेषक और सच्चे अनुभवों के प्रेरक लेखक हैं। बचपन से ही उन्हें जीवन की गहरी रहस्यात्मकता और आत्मा के गूढ़ आयामों का अनुभव हुआ, जिसने उन्हें साधना, ध्यान और सूक्ष्म चेतना के मार्ग पर अग्रसर किया। उनकी शिक्षा में आधुनिक ज्ञान के साथ-साथ प्राचीन भारतीय दर्शन, मंत्रशास्त्र और ऊर्जा विज्ञान का समन्वय मिलता है, जिससे वे जीवन के गूढ़ प्रश्नों को सरल, स्पष्ट और बोधपूर्ण भाषा में समझाते हैं।
ऋषि रोहित शर्मा ने आध्यात्मिक एवं जीवन-दर्शन के विषयों को अध्ययन और अनुभव दोनों के स्तर पर गहराई से समझने का प्रयास किया है। उनके लेखन में न केवल दर्शनशास्त्र की सूक्ष्मता है, बल्कि जीवन के अनुभवों का व्यावहारिक अनुभव भी मिलता है, जो पाठकों के आत्म-चिंतन, जागृति और भीतर के विकास को प्रेरित करता है।
उनकी पुस्तक “मेरी दिव्य दृष्टि की यात्रा – भाग 1” इसी यात्रा का प्रथम चरण है, जिसमें उन्होंने आत्मा के गहन अनुभवों, तीसरी आँख की वास्तविकता और दिव्य चेतना के व्यावहारिक दर्शन को सरल हिंदी में साझा किया है। उनकी लेखनी भावनात्मक, गूढ़ और आत्मकथात्मक है, जो आधुनिक पाठक को सहजता से आध्यात्मिक गहराइयों से जोड़ती है।
ऋषि रोहित शर्मा का मानना है कि आत्मिक खोज किसी स्थान, समय या रूप तक सीमित नहीं होती — बल्कि यह हर इंसान के भीतर ही प्रकाशित होती है, जिसे सही दृष्टि, अभ्यास और संकल्प से देखा जा सकता है। उनकी शिक्षा और अनुभव दोनों ही जीवन के वास्तविक सत्य की ओर मार्गदर्शक हैं।
India
Malaysia
Singapore
UAE
The items in your Cart will be deleted, click ok to proceed.