नटखट कन्हैया जिनके सहस्त्रों नाम हैं, उन कान्हा की उपमा शब्दों में व्यक्त करना तो मानो किसी कवि के सामर्थ्य की बात है ही नहीं। प्रेम के वशीभूत होकर हमारा एक किंचित सा प्रयास है गिरधारी के समक्ष अपना प्रेम शब्दों में प्रस्तुत करने का। यहां प्रत्येक लेखक के लेख कृष्ण प्रेम में सने हुए शब्दों से अलंकृत हैं। आशा है, प्रत्येक पाठक के मन को ये भाएं और यदि कोई त्रुटि हो तो हमारे कृष्ण कन्हाई हमें अबोध समझ कर क्षमा करे।।
कभी माखन चोर तो कभी लीलाधर कहते हैं,